अनंत चतुर्दशी:2024 पूजा विधि और समाग्री
अनंत चतुर्दशी:2024 पूजा विधि और समाग्री
अनंत चतुर्दशी हिन्दू धर्म का एक मुख्य पर्व है, जिसे भगवान विष्णु की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से अनंत भगवान की पूजा की जाती है और लोग सुख, समृद्धि और शांति के लिए अनंत सूत्र बांधते हैं। इस व्रत को रखने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशहाली आती है। यह त्योहार गणेश उत्सव के अंतिम दिन भी मनाया जाता है, जब गणपति विसर्जन होता है। यहां अनंत चतुर्दशी की पूजा की जाती है 17 सितम्बर 2024 को पड़ रहा है
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पूजा
अनंत चतुर्दशी के दिन स्नान और शुद्धता सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को अच्छे से साफ करें और वहां एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर एक कपड़ा बिछाकर रखें
पूजा सामग्री
पूजा के लिए थाली में नारियल, सुपारी, फूल, फल, पान के पत्ते, रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, मिठाई, कलश, गंगाजल अन्न और अनंत धागा रखें। अनंत धागा मुख्य सामग्री है, जो कच्चे धागे में 14 गांठें लगाकर तैयार किया जाता है। इसके अलावा भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति भी पूजा में रखी जाती है।
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि
अनंत चतुर्दशी पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, अक्षत, फूल और सुपारी लेकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और संकल्प लें कि आप अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा विधिपूर्वक करेंगे।
कलश स्थापना
एक मिट्टी या धातु के कलश में जल भरें और उसमें एक सुपारी रखें। कलश पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल रखें। इस कलश की स्थापना विष्णु भगवान का प्रतीक मानकर की जाती है इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं
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भगवान विष्णु की पूजा
भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं। फिर भगवान को पुष्प अर्पित करें और उन्हें मिष्ठान्न या फल चढ़ाएं। तुलसी के पत्ते विशेष रूप से विष्णु भगवान को चढ़ाए जाते हैं तुलसी भगवान विष्णु को बहुत पसंद है
अनंत सूत्र धारण
अब पूजा के सबसे महत्वपूर्ण चरण में अनंत धागे को भगवान विष्णु के चरणों में रखकर पूजा करें। यह धागा कच्चे धागे का होता है, जिसमें 14 गांठें होती हैं। यह धागा भगवान विष्णु का आशीर्वाद स्वरूप माना जाता है। पुरुष इसे दाहिनी भुजा में और महिलाएं इसे बाईं भुजा में बांधती हैं। अनंत सूत्र बांधते समय यह मंत्र पढ़ा जाता है
ॐ अनंताय नमः
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व्रत कथा
अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कथा के अनुसार, राजा सुतासन और रानी शीला के जीवन में दुखों की भरमार थी, और भगवान विष्णु ने अनंत सूत्र के माध्यम से उन्हें सुख और समृद्धि का आशीर्वाद दिया और उनका शेष जीवन खुशी और आनंद में बीता उन्हें भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हुई
आरती
पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। सभी परिवारजन एकत्रित होकर आरती में भाग लेते हैं। आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।
व्रत पालन
अनंत चतुर्दशी इस दिन व्रती को उपवास रखना चाहिए और फलाहार करना चाहिए। दिन भर भगवान विष्णु का ध्यान करें और शुभ कार्यों में मन लगाएं और अपने मन को साफ रखें मन में किसी के प्रति ईर्ष्या न रखें
पूजा के बाद विसर्जन
अनंत चतुर्दशी के दिन, यदि आप गणेश उत्सव भी मना रहे हैं, तो गणपति की प्रतिमा का विसर्जन इस दिन किया जाता है। गणपति बप्पा को गाजे-बाजे के साथ नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है, जिससे समृद्धि और मंगलकारी जीवन की कामना की जाती है ऐसा करने से आपको बहुत तुम मिलता है और जीवन में खुशियां आती हैं
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि से जीवन में शांति, समृद्धि और संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। यह पर्व हमें भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना के माध्यम से सिखाता है कि उनके प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति से जीवन में हर कठिनाई का समाधान संभव है। दोस्तों यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे शेयर अवश्य करें शेयर करना फ्री है
Publish date
12/9/2024
Time
9:00
Devendra kumar

