ऋषि पंचमी 2024 : व्रत कथा से होगा लाभ


ऋषि पंचमी 2024 : व्रत कथा से होगा लाभ सुख समृद्धि और शांति आयेगी 


 ऋषि पंचमी 2024 का त्यौहार हिन्दू पंचांग के भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाया जाता है।यह त्यौहार गणेश चतुर्थी के अगले दिन होता है। इस त्यौहार में सप्त ऋषियों के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त किया जाता है। ऋषि पंचमी तिथि सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने से साधक को जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिल सकती है। इस दिन व्रत करने से ऋषि पंचमी 2024 की व्रत-पूजा से लाभ होगा सुख शांति और समृद्धि आएगी


ऋषिपंचमी व्रत कथा

ऋषिपंचमी 2024 का व्रत भाद्रपद शुक्ल पंचमी को किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है, हालांकि इसे पुरुष भी कर सकते हैं। मी व्रत के पीछे मुख्य उद्देश्य हमारे जीवन में शुद्धता, पवित्रता और सदाचार को बनाए रखना है। इस व्रत के पालन से मनुष्य अपने पापों से मुक्त हो जाता है और जीवन में सुख-शांति प्राप्त करता है

ऋषि पंचमी कथा

प्राचीन काल में विदर्भ देश में उत्तक नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ निवास करता था। वह धार्मिक, सत्यवादी और नियमों का पालन करने वाला था। उसकी पत्नी भी धार्मिक थी। उनके घर में सब कुछ था, लेकिन उनके जीवन में एक ही दुःख था कि उनके कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने अनेक धार्मिक अनुष्ठान किए, पूजा-पाठ किया, परंतु उन्हें कोई संतान प्राप्त नहीं हुई वह बहुत दुखी थे उन्होंने बहुत तपस्या की



कई वर्षों बाद उनकी तपस्या सफल हुई और उन्हें एक पुत्र और पुत्री की प्राप्ति हुई। पुत्री विवाह के योग्य हुई एक अच्छे ब्राह्मण के साथ उसका विवाह हो गया। कुछ वर्षों बाद उसकी पुत्री विधवा हो गई और अपने माता-पिता के साथ रहने लगी वह बहुत दुखी थी

विधवा पुत्री

विधवा होने के कारण वह पुत्री अपनी मां के साथ घर के कामों में मदद करती थी। एक दिन उसकी माता को अचानक त्वचा पर कीड़े लगने लगे। यह देखकर ब्राह्मण उत्तक को चिंता हुई और उन्होंने ज्योतिषियों से इसका समाधान पूछा। ज्योतिषियों ने कहा कि यह समस्या उनकी पुत्री के पिछले जन्म के पापों का परिणाम है। पुत्री ने अपने पूर्व जन्म में रजस्वला (मासिक धर्म) के समय अशुद्ध अवस्था में घर के काम किए थे, जिसके कारण यह पाप उसके वर्तमान जीवन में भी उसके परिवार पर प्रभाव डाल रहा है

ऋषिपंचमी का व्रत

ब्राह्मण उत्तक और उसकी पत्नी इस बात से बेहद चिंतित हो गए और उन्होंने एक ऋषि से इस समस्या का समाधान पूछा। ऋषि ने उन्हें बताया कि यदि उनकी पुत्री ऋषिपंचमी का व्रत करे और सप्तऋषियों की पूजा करे, तो उसके पाप समाप्त हो जाएंगे और परिवार पर लगे दोष भी समाप्त होंगे और पूर्व जन्म के पापा से मुक्ति मिल जाएगी तथा पुण्य प्राप्त होगा घर में सुख शांति समृद्धि आएगी


ऋषि ने बताया कि ऋषिपंचमी व्रत के दिन सप्तऋषियों की पूजा की जाती है और इस व्रत को पूर्ण विधि-विधान से करने पर समस्त पापों का नाश होता है। सप्तऋषि – वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, और भारद्वाज की पूजा करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है


ऋषिपंचमी व्रत की विधि

ऋषि की बात मानकर ब्राह्मण की पुत्री ने पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से ऋषिपंचमी का व्रत किया। उसने स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण किए और सप्तऋषियों की पूजा की। व्रत का पालन करने से उसके सारे पाप धुल गए और उसके माता-पिता के ऊपर से भी दोष समाप्त हो गया। इसके बाद से वह परिवार सुख-शांति से रहने लगा

ऋषिपंचमी 2024 का व्रत आज भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। इस व्रत का उद्देश्य जीवन में शुद्धता और पवित्रता बनाए रखना है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसका संबंध मासिक धर्म के समय की शुद्धता से जुड़ा है। इस व्रत के पालन से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करता है पोस्ट अच्छी लगी तो इस पोस्ट को शेयर अवश्य करना धन्यवाद दोस्तों


Publish Date

8/9/2024

Time 10:30

Devendra Kumar