देव दीपावली:धरती पर आए देवता
कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली:धरती पर आए देवता जब देव दिवाली मनाई जाती है
भारत की धरती उत्सवों की धरती है यहां हर त्योहार सिर्फ रस्में निभाने का माध्यम नहीं होता है बल्कि उसमें जीवन जीने की एक राह छिपी होती है। ऐसा ही एक पावन पर्व है देव दीपावली जिसे देवताओं की दीपावली कहा जाता है यह त्योहार वाराणसी काशी की पहचान बन चुका है और जो भी इसे एक बार देख लेता है वो जीवनभर उस नज़ारे को भूल नहीं पाता है
देव दीपावली क्या है?
देव दीपावली हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है यानी दीपावली के ठीक 15 दिन बाद मान्यता है कि इसी दिन देवता स्वयं स्वर्ग से उतरकर काशी में गंगा तट पर दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं
काशी की गलियां, घाट और मंदिर लाखों दीयों से जगमग हो उठते हैं ऐसा लगता है जैसे गंगा खुद सुनहरी साड़ी पहनकर मुस्कुरा रही हो इस दृश्य को देखने के लिए देश- विदेश से श्रद्धालु आते हैं
दिवाली और देव दीपावली में अंतर
कई लोग सोचते हैं कि दिवाली और देव दीपावली एक ही पर्व हैं लेकिन दोनों में अंतर है
दिवाली अमावस्या की रात को मनाई जाती है जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे
देव दीपावली पूर्णिमा की रात को होती है जब देवता स्वयं दीप प्रज्ज्वलित करते हैं
कह सकते हैं कि दिवाली इंसानों की होती है और देव दीपावली देवताओं की
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दिवाली देव कैसे मनाई जाती है
देव दीपावली की शुरुआत सूर्योदय से पहले ही हो जाती है वाराणसी के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगती है हवा में गंगा आरती की धुन मंत्रों का उच्चारण और दीपों की रोशनी मिलकर एक आलौकित माहौल बना देते हैं
पूरे आयोजन को कुछ मुख्य रूप से देखा जा सकता है:
1. स्नान और दान
इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। लोग स्नान के बाद गरीबों को भोजन, वस्त्र और दीपदान करते हैं उनको बहुत ही पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है धन और यश कीर्ति बढ़ता है
2. दीपदान
संध्या होते ही घाटों पर दीप जलाए जाते हैं काशी के प्रसिद्ध घाट दशाश्वमेध, अस्सी पंचगंगा मणिकर्णिका राजघाट आदि घाटों पर लाखों दीयों जगमगाते हैं लोग अपने- अपने घरों में भी दीप जलाते हैं और भगवान शिव और गंगा माता और देवताओं का आह्वान करते हैं कुछ लोग जानते हैं मैं अपने घर पर भी दीपक जलते हैं और इस दिवाली को मानते हैं
3. गंगा आरती
शाम को जब सूरज अस्त होता है तब भव्य गंगा आरती होती है। घंटियों शंखों और दीपों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है यह दृश्य इतना सुंदर होता है कि शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता
4. भगवान शिव की पूजा
मान्यता है कि देव दीपावली के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था इसीलिए इस दिन शिव पूजन का विशेष महत्व है
लोग शिवलिंग पर जल दूध, बेलपत्र चढ़ाते हैं और मंत्रों से आराधना करते हैं
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देव दीपावली की पूजन विधि
अगर आप वाराणसी नहीं जा पा रहे तो घर पर भी बहुत सरल तरीके से देव दीपावली मना सकते हैं
सवेरे स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
घर के मंदिर को साफ करें और भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें
जल, दूध, शहद, दही और घी से पंचामृत अभिषेक करें
दीप जलाकर गंगा माता भगवान शिव और देवताओं का स्मरण करें
ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
रात में घर की छत दरवाजे और आंगन में दीपक जलाएं
जरूरतमंदों को दान देना न भूलें यही पूजा का सबसे पवित्र हिस्सा है
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देव दीपावली के फायदे
देव दीपावली सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है बल्कि इसमें छिपे हैं कई गहरे लाभ जिनसे आपको बहुत फायदा होने वाला है
1. मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा
दीप जलाने का मतलब है अंधकार पर प्रकाश की विजय जब घर में दीये जलते हैं तो वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है मन शांत होता है और चिंता दूर होती है और मन प्रसन्न रहता है
2. शुद्ध वातावरण
दीपक का प्रकाश वातावरण को पवित्र करता है सरसों या घी का दीपक जलाने से वायु में एक सुखद सुगंध फैलती है जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी मानी जाती है मन को एक अद्भुत शांति प्राप्त होती है
3. दान का महत्व
देव दीपावली हमें दान की भावना सिखाती है गरीबों की मदद अन्नदान और वस्त्र दान से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि समाज में बराबरी की भावना भी मजबूत होती है अगर आप दान करेंगे तो आपको उसका पुण्य अवश्य मिलेगा जो आपने दान किया है वही आपको मिलेगा
4. सांस्कृतिक एकता
वाराणसी के घाटों पर जब हर धर्म हर वर्ग का व्यक्ति दीप जलाता है तो यह भारत की एकता में विविधता की जीवंत मिसाल बन जाती है
5. परिवार और समाज में प्रेम बढ़ता है
इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं रिश्तेदारों से मिलते हैं साथ मिलकर दीप जलाते हैं इससे आपसी प्रेम और अपनापन बढ़ता है
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देव दीपावली का जुड़ाव
अगर आपने कभी वाराणसी की देव दीपावली देखी है तो जानते होंगे कि यह सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है
रात का अंधेरा गंगा की लहरें हजारों दीयों की कतारें और हवा में घुला मंत्रो उच्चारण ऐसा लगता है मानो पूरा ब्रह्मांड थम गया हो
उस पल में इंसान को महसूस होता है कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं बल्कि इसी प्रकाश में इसी प्रेम ईश्वर बसते हैं
निष्कर्ष
देव दीपावली हमें सिखाती है कि जब हम अपने भीतर का दीप जलाते हैं तभी सच्ची रोशनी फैलती है। यह त्योहार सिर्फ दीये जलाने का नहीं बल्कि आत्मा को प्रकाशित करने का पर्व है चाहे आप काशी में हों या अपने घर पर अगर आप श्रद्धा से एक दीप जलाते हैं तो वही देव दीपावली की असली भावना है आप कोई भी काम सच्चे मन से करेंगे तो ईश्वर की कृपा आप पर अवश्य बनी रहेगी
हर हर गंगे हर हर महादेव
Publisher
Devendra Kumar
Time 10.00
Date 5/ 11/2025

