श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं: Geeta ka updesh



श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं: Geeta ka updesh

भागवत गीता में श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मेरे जीवन में अनेकों कष्ट दुख तकलीफ़ आयी थी 

आज मैं आपके सामने श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं: गीता का उपदेश (Geeta Ka Updesh) इस विषय पर अपने मन के भाव साझा करने जा रहा हूँ। यह लेख कोई उपदेश देने के लिए नहीं है बल्कि श्री कृष्ण के जीवन और उनके शब्दों से हमें क्या सीख मिलती है उसी को सरल भाषा में समझाने की एक कोशिश है जब इंसान जीवन की परेशानियों से घिर जाता है तब अगर वह गीता के उपदेशों को समझ ले तो उसका जीवन देखने का नजरिया ही बदल सकता है






श्री कृष्ण का जीवन: दुखों से भरा फिर भी मुस्कान से भरा


श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं अर्जुन, तुम अपने जीवन के दुखों से घबरा रहे हो पर एक बार मेरे जीवन को देखो

मेरे जन्म से पहले ही मेरी हत्या का षड्यंत्र रचा जा चुका था। कंस को भविष्यवाणी हो चुकी थी कि देवकी की आठवीं संतान उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। उसी दिन से मेरा जीवन संकटों से घिर गया। जन्म के बाद मैं अपनी असली माता-पिता देवकी और वासुदेव से दूर कर दिया गया। यह कोई छोटी पीड़ा नहीं थी लेकिन फिर भी यह मेरे जीवन की सच्चाई थी

जन्म के कुछ ही दिनों बाद पूतना मुझे विष पिलाने आई। वह मुझे मारने आई थी लेकिन ईश्वर की इच्छा कुछ और थी जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे असुर मेरी मृत्यु के लिए आते गए। कभी बकासुर कभी अघासुर कभी कालिया नाग हर कदम पर मृत्यु मेरा इंतजार कर रही थी

 

प्रेम भी त्यागना पड़ा, फिर भी मन शांत रहा

श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं अर्जुन, मैंने भी प्रेम किया था।
ब्रज की गलियों में गोपियों के साथ राधा के साथ मेरा प्रेम केवल एक कहानी नहीं बल्कि आत्मा का मिलन था लेकिन फिर भी मुझे राधा को छोड़कर मथुरा जाना पड़ा अपने प्रेम अपने लोगों अपने ब्रजवासियों को छोड़ना पड़ा। यह त्याग आसान नहीं था लेकिन जीवन में कर्तव्य प्रेम से भी बड़ा होता है
आज मनुष्य थोड़ा-सा दुख आते ही टूट जाता है। छोटी-सी असफलता थोड़ी-सी आर्थिक परेशानी रिश्तों में हल्की-सी खटास और इंसान घबरा जाता है लेकिन श्री कृष्ण कहते हैं कि दुख जीवन का अंत नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है

दुख आए तो घबराओ मत सामना करो

श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं अर्जुन, दुख आए तो घबराने के स्थान पर उसका सामना करना चाहिए
दुख इसलिए नहीं आते कि हमें तोड़ा जाए बल्कि इसलिए आते हैं ताकि हमें मजबूत बनाया जा सके। जब जीवन में दुख आता है तभी हमें सुख की असली कीमत समझ में आती है अगर जीवन में कभी दुख न हो तो सुख का एहसास भी फीका पड़ जाता है
आज का मनुष्य चाहता है कि जीवन में सब कुछ आसान हो। बिना संघर्ष के सफलता मिले बिना मेहनत के फल मिले। लेकिन गीता का उपदेश इससे बिल्कुल अलग है

गीता का उपदेश: कर्म करो फल की चिंता मत करो

श्री कृष्ण अर्जुन से साफ कहते हैं कर्म करो फल की कामना मत करो फल मैं दूँगा।
यह गीता का सबसे बड़ा और सबसे गहरा उपदेश है आज मनुष्य हर काम इसलिए करता है कि उसे तुरंत फल मिले। अगर फल देर से मिले या उम्मीद के अनुसार न मिले तो वह निराश हो जाता है
श्री कृष्ण कहते हैं कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है फल पर नहीं। अगर तुम पूरी ईमानदारी से अपना कर्म करते रहोगे तो सही समय पर तुम्हें उसका फल अवश्य मिलेगा

जीवन में धैर्य क्यों जरूरी है

अर्जुन युद्धभूमि में खड़ा होकर अपने ही लोगों को देखकर विचलित हो गया। उसका मन डगमगा गया। तब श्री कृष्ण ने उसे समझाया कि धैर्य ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है
जिसने धैर्य खो दिया उसने सब कुछ खो दिया। दुख के समय धैर्य रखना आसान नहीं होता लेकिन वही समय असली परीक्षा का होता है। जो व्यक्ति दुख में भी शांत रहता है वही जीवन में आगे बढ़ता है

आज का मनुष्य और गीता का संदेश

आज का मनुष्य छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो जाता है।
काम नहीं चला तो तनाव
पैसा कम हुआ तो चिंता
रिश्तों में थोड़ी परेशानी आई तो निराशा
लेकिन अगर वही मनुष्य गीता के उपदेश को समझ ले तो उसका जीवन बदल सकता है श्री कृष्ण का जीवन खुद इस बात का प्रमाण है कि विपत्तियाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों अगर मन मजबूत हो तो इंसान मुस्कुराता रह सकता है

दुख ही हमें मजबूत बनाता है

श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं अर्जुन, याद रखो, दुख ही मनुष्य को मजबूत बनाता है
जब-जब जीवन में कठिन समय आता है, तब-तब इंसान खुद को पहचानता है जो लोग दुख से भागते हैं वे कभी जीवन की गहराई को नहीं समझ पाते और जो दुख का सामना करते हैं वही जीवन में सफल होते हैं

गीता का उपदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक

यह सोचना गलत है कि गीता सिर्फ महाभारत के समय के लिए थी। गीता का उपदेश आज भी उतना ही सच है जितना हजारों साल पहले था आज भी मनुष्य वही संघर्ष कर रहा है मन का संघर्ष निर्णय का संघर्ष जीवन का संघर्ष
अगर आज का मनुष्य गीता के उपदेश को अपने जीवन में उतार ले तो वह तनाव डर और निराशा से काफी हद तक मुक्त हो सकता है

श्री कृष्ण की मुस्कान हमें क्या सिखाती है

इतनी विपत्तियों के बाद भी श्री कृष्ण के चेहरे पर मुस्कान बनी रही। यह मुस्कान हमें सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर मन शांत है तो जीवन सुंदर है
श्री कृष्ण कहते हैं जीवन में दुख आएगा, लेकिन दुख को अपने ऊपर हावी मत होने दो।

निष्कर्ष 

दोस्तों श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं गीता का उपदेश सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है श्री कृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि दुख से डरना नहीं चाहिए बल्कि उसका सामना करना चाहिए
कर्म करते रहो, धैर्य रखो, और फल ईश्वर पर छोड़ दो। यही गीता का सार है यही जीवन का सत्य है
अगर आज का मनुष्य इस उपदेश को समझ ले तो उसका जीवन ज्यादा शांत संतुलित और सफल हो सकता है
उम्मीद है यह लेख आपके दिल को छू गया होगा और आपको जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। धन्यवाद दोस्तों